धनबाद(DHANBAD) मेरे सुधार के नाम कई नेता, अफसर देश विदेश कई जगह घूम आए हैं। पर मेरी हालत बिगड़ती जा रही है। यहां से पैसे कमाकर लोग देश विदेश में बड़े आदमी बने हुए हैं। यहां से पढ़कर कई लोग विश्व में नाम कमा रहे हैं। पर किसी को मेरी दुर्दशा का अहसास नही है।
हर तरफ़ गंदगी हैं, सड़क जाम हैं, प्रदूषण हैं, मेरे बच्चें बीमारियों से पीड़ित हैं। पर किसी को कोई सुध नहीं है।
मेरा जन्म 1956 मे हुआ था। जब नेहरु जी प्रधान मंत्री थे। वे मुझे बहुत प्यार करते थे। उन्होंने मेरी बेहतरी के लिए बहुत काम किया। बड़े बड़े डेम, कल कारखाने बनाए। शिक्षण संस्थान बनवाए। पूरे देश के लोग मेरी गोद में रोजगार, जीवन यापन के साधन ढूंढते हुए आए। मुझे एक बहुत बड़ी सौगात भी मिली
धनबाद में एयरपोर्ट 40 साल पहले जिनको हमने चुना था उनकी तारफ से मीला। वो धनबाद शहर को AIRPORT के लायक मानकर। यहां एयरपोर्ट बनवाकर। उस पर वायुदूत हवाई सेवा शूरू भी करवा दिए थे।
पिछले तीस साल से यहां के वाशिंदों ने
नाम पर वोट देने की जिद कर लिए।चाहे कितना भी बूरा हो। हम वोट काम पर नहीं नाम पर देगें
पुरे विश्व में तरक्की हुई है। लेकिन मेरी हालत खराब होती जा रही है। कल कारखाने नए तो आ नही रहे। पुराने बंद होते जा रहे हैं। जो मैं 40 साल पहले एयरपोर्ट के लायक था।आज नही हूं।
इसका दोषी कौन है। हैं कोई ज़िम्मेदार जो अपनी गलती माने और मिलकर सुधार का प्रयास करें?
पुरे विश्व में ऐसा उदाहरण नहीं मिलेगा? पूरा देश विकाश कर रहा है। मैं विनाश की ओर धकेला जा रहा हूं।
जबकि इन 30 सालों मैंने जो राजस्व केन्द्र सरकार, राज्य सरकार को टैक्स, बिजली कर,INCOME TAX,GST CESS इत्यादि से रूप में दिया है। उसमे हर साल बढ़ोतरी हो रही है।
उसमे हर साल वृद्धि हो रही है। इस साल INCOME TAX मे लगता है कुछ कमी आई है तो। INCOME TAX वाले लगातार छापामारी अभियान चला रहे हैं।
आप बताएं मुझसे एयरपोर्ट छीन लिया गया?कितनी रेल सेवा छीन लिया है?रोड़ चौड़ीकरण के नाम पर, नई बिल्डिंग बनाने के नाम पर हरियाली खत्म।हजारीबाग में कमिश्नरी हैं।LIC HQ हजारीबाग मे हैं।Coal India का HQ कोलकाता है। देश का सबसे प्रदूषित शहर धनबाद हैं। सबसे ज्यादा बीमार यहां हैं। पर AIIMS देवघर में बना। किसी जनता,जनप्रतिनिधि ने इसका विरोध नही किया।
हर जगह मेरे साथ सौतेला व्यवहार होता है। कोई जन प्रतिनिधि मेरे बारे मे संसद, विधान सभा में आवाज बुलंद नही करता है।
मेरे ऊपर की हरियाली को तहस नहस कर दिया है। मैं कई जगह अंदर ही अंदर जल रहा हूं। कोयला की आग बुझे इसके लिए कोई प्रयत्नशील नही है। पर कोयले की दलाली,आउटसोर्सिंग से कमीशन लेने के लिए सब प्रयत्नशील है।
इसके विरुद्ध मैं कहा छापा मारी करू। इसके विरुद्ध क्या आभियान चलाऊ?
जो भी नेता अफसर आते हैं। वे पैसा खर्च कर आते हैं या पैसा के बल पर चुने जाते हैं। किसीको मुझसे प्यार नही है।
सभी लोग मुझे पैसे छापने की मशीन समझते हैं। खुले आम लोहा, कोयला, बालू अन्य खनिज की लूट मची है। सब लूट सके तो लूट के सिद्धांत पर जोर आजमाइश कर रहे हैं
किसी को मुझसे प्यार नही है। ज्यादातर लोग बाहर से आकर मेरा चीरहरण कर पैसे कमाने में लगे हैं।
अफसर: हर काम मे कमीशन चाहिए। काम कितना ही घटिया हो कोई मतलब नहीं। कितनी योजना बनी धरातल पर उतारने के बजाय कमाई पर जोर हैं। काम दस दस साल विलंब से हो रहा है।
नेता: खुद को कहलाते तो हैं जनसेवक पर ध्यान कोयला की दलाली, ठेका पट्टा में कैसे कमाए पर ही हैं।
पुलिस: जांच आभियान सड़क सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि कमाई के लिए करती है।
कुल मिलाकर हर कोई मेरा ज्यादा से ज्यादा दोहन करने में लगा है। सब पैसा यहां कमा रहे हैं और खर्च बाहर कर रहे हैं।
कौन सुनेगा? किसको सुनाऊं? इसलिए चुप रहते हैं
NEWS ANP के लिए झरिया से भोला बाउरी की रिपोर्ट…

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