मां काली के भक्त गणेश यादव उर्फ काले कंबल बाबा का दावा.04 साल से लोगों की असाध्य बीमारियों को ठीक करने का दावा…बंगाल पहुंचे है काले कंबल बाबा …जानिए बाबा का चमत्कार या अंधविश्वास ..

आसनसोल (ASANSOL): पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से करीब ढाई सौ किलोमीटर दूर आसनसोल के बर्णपुर इलाके मे स्थित शिव मंदिर मे सुबह चार बजे से पिछले पाँच दिनों से उमड़ रही भक्तों की भीड़ रात दस बजे तक ख़त्म होने का नाम नही ले रही है, आप हैरत मे होंगे और सोंच मे भी होंगे की आखिरकार इस शिव मंदिर मे ऐसा क्या है की लोग इतनी भारी संख्या मे जुट रही है..

पर्ची वाले बागेश्वर बाबा के बाद अब सामने आए काली कंबल वाले बाबा, लगाया पश्चिम बंगाल मे दरबार..

भारी संख्या मे उमड़ रहा लकवा ग्रस्त कैंसर व गूंगे बहरों के साथ -साथ कई अन्य असाध्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों का भीड़..

बताते चलें की इस शिव मंदिर मे पिछले पाँच दिनों से गणेश यादव उर्फ़ काली कंबल वाले बाबा पहुँचे हुए हैं, जो रहने वाले तो थे गुजरात के पर वह अभी फिलहाल राजस्थान मे रहते हैं, उनकी अगर माने तो उनको चार साल की उम्र मे माँ काली ने काले कंबल का सपना दिया था, तब उनको माँ काली के कृपा से काला कंबल मिला और फिर उस कंबल से वह चार साल के उम्र से ही लोगों की असाध्य बीमारियों को ठीक कर रहे हैं, बाबा का यह दावा है की वह जिस मरीज के ऊपर अपना काला कंबल माँ काली का नाम लेकर ओढ़ा देते हैं वह मरीज ठीक हो जाता है, बाबा ने यह भी दावा किया की वह अपने काले कंबल से नी संतानो को संतान, लकवा, कैंसर, पोलियो, शुगर, बीपी जैसे कई असाध्य बीमारी ठीक हो जाती है, बाबा ने यह भी कहा की उनका उम्र करीब 54 साल हो गया वह पिछले 36 सालों से अपने घर से बाहर हैं और देश के विभिन्न राज्यों मे घूम -घूमकर शिविर लगाते हैं और शिविर मे आने वाले मरीजों का अपने कंबल से इलाज करते हैं, बाबा ने यह भी दावा किया की वह बिना पैसे लिये उनके शिविर मे आए मरीजों का इलाज करते हैं, बाबा ने कहा बंगाल उनको बहोत अच्छा लगता है, यहाँ के लोग बहोत अच्छे हैं, उन्होंने अपने शिविर मे एक शुगर मरीज को ठीक किया जिसके बाद से वह मरीज उनके लिये हर रोज गुड़ का बना रसगुल्ला लेकर आता है, जिस रसगुल्ले को वह बहोत ही पसंद और चाव से खाते हैं, पर बाबा के इस शिविर मे देखा गया की कुछ लोग शिविर मे आए लोगों को खाने पिने के लिए स्टॉल लगाए हुए थे, जिन स्टॉलो मे खिचड़ी के 20 रुपए, चाय के पाँच रुपए, पानी के दस रुपए, बिस्कुट पाँच रुपए से लेकर दस रुपए तक केक पाँच से बीस रुपए तक यहाँ तक की शिविर मे इच्छा अनुसार एक गोल्ड प्लेटेड यन्त्र भी दिया जा रहा था जिसका कीमत पाँच सौ रूपये रखा गया था, ऐसे मे शिविर मे लोगों की जो भीड़ थी वह भीड़ लगभग दस हजार से ऊपर की होगी लोग मरीज लेकर आ रहे थे जा रहे थे तब भी शिविर मे लोगों की भीड़ ख़त्म होने का नाम नही ले रही थी शिविर के अंदर से लेकर बाहर तक लोगों की भारी भीड़ थी, ऐसे मे अगर हम दस हजार लोगों की ही बात करें तो उनके द्वारा शिविर मे ख़रीदे गए खिचड़ी, चाय, पानी, गोल्ड प्लेटेड यन्त्र, बिस्किट और केक की राशि करीब पचास लाख रुपए से ऊपर की है, जो राशि और भी बढ़ सक्ति है, ऐसे मे बताया यह भी जा रहा है की बाबा के इस इस शिविर का आयोजन खुद एक कैंसर अस्पताल चलाने वाले संतोष भाईजी ने किया है, उन्होने कहा की उन्होने यूट्यूब पर काले कंबल वाले बाबा को पहली बार देखा था उसी वक्त उन्होंने यह ठान लिया की वह बाबा को आसनसोल लेकर आएंगे और यहाँ के लोगों की समस्याओं को उनके कंबल से दूर करवाएंगे, और वह बाबा को लेकर आए उन्होंने यह दावा किया की शिविर के पहले दिन ही एक अंधी महिला को ठीक किया महिला देखने लगी जिसके बाद उनको कंबल वाले बाबा के प्रति आस्था और भी बढ़ गई और वह निष्ठा के साथ शिविर मे बाबा के साथ लोगों की सेवा मे जुट गए, ऐसे मे शिविर मे आने वाले कुछ मरीजों की अगर माने तो बाबा के कंबल से उनको थोड़ा तो आराम मिल रहा है पर बाद मे उनकी समस्या वैसी ही रह रही है,

कुछ मरीजों का यह भी मानना है की बाबा के कंबल से उनकी शरीर की समस्या लगातार धीरे -धीरे ख़त्म हो रही है, तो उनमे कुछ ऐसे भी मरीज हैं जिनको बाबा के कंबल से उनकी समस्या जैसे पहले थी ठीक वैसे ही है, उनकी समस्या का समाधान नही हुई है..अब सवाल है ये चमत्कार है या अंध विश्वास…क्या आज के वैज्ञानिक युग कोई कंबल से इलाज कैसे संभव है…

NEWS ANP के लिए आसनसोल से अमरदेव की रिपोर्ट…