UPSC ACTION : ट्रेनी IAS पूजा खेडकर की उम्मीदवारी रद्द,फर्जी विकलांगता और जाति प्रमाणपत्र मामले में पाई गई दोषी,भविष्य में यूपीएससी परीक्षा में शामिल होने पर लगी रोक..

नई दिल्ली(NEW DELHI) अपने निजी ऑडी गाड़ी पर लाल नीली बत्ती लगाकर चर्चा में आने वाली ,ट्रेनी आईएएस हो कर अपने मातहत अफसर पर धौंस जमाने वाली ,ओबीसी कोटा और विकलांगता का फर्जी प्रमाण पर 11बार परीक्षा में शामिल होने वाली, किसी मॉडल अभिनेत्री की तरह लक्जरी लाईफ जीने की आदि पूजा खेड़कर की कहानी भी किसी रुपहले फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है…लेकिन उसके झूठ फरेब और फर्जीवाड़ा का खुलासा होते ही उसकी IAS अफसरी सदा के लिए चली गई…अब भविष्य में आईएएस बनना तो दूर देश के प्रतिष्ठित यूपीएससी के किसी परीक्षा में शामिल होने पर रोक लगा दी गई है…

जानिए ट्रेनी आईएएस अफसर Puja khedekar ki करतूत..अर्श से फर्श तक की कहानी..

फर्जी विकलांगला और ओबीसी प्रमाण पत्र देकर धोखाधड़ी से ज्यादा बार यूपीएससी परीक्षा देने में फंसीं महाराष्ट्र की पूजा खेडकर के खिलाफ यूपीएससी ने बड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने 2023 बैच की ट्रेनी आईएएस अफसर पूजा की उम्मीदवारी रद्द करते हुए भविष्य में यूपीएससी की किसी परीक्षा में शामिल होने पर रोक लगा दी।

पूजा को सीएसई-2022 नियमों के उल्लंघन करने का दोषी माना गया है।

UPSC आयोग ने कहा, पूजा ने धोखाधड़ी से तय सीमा से ज्यादा बार परीक्षा दी। उन्हें 18 जुलाई को कारण बताओ नोटिस देकर 25 तक जवाब मांगा गया था। उन्होंने 4 अगस्त तक का समय मांगा, पर आयोग ने 30 जुलाई तक का समय दिया। समय पर जवाब न देने पर मौजूदा रिकॉर्ड की जांच कर उन्हें दोषी ठहराया गया। आयोग ने बताया, उसने इस मामले में 2009 से 2023 तक 15 हजार से ज्यादा चयनित उम्मीदवारों के रिकॉर्ड की जांच की है। पहली बार ऐसा मामला सामने आया, जिसमें फर्जीवाड़ा कर निर्धारित से ज्यादा अटेम्ट दिए गए।

पूजा पर भारी पड़ गई पुणे में 18 दिन की ट्रेनिंग के दौरान दिखाई हेकड़ी

यूपीएससी को गुमराह करने वाली पूजा खेड़कर मामले में सबसे पहले महाराष्ट्र के एक RTI कार्यकर्ता ने खोला पोल…

यूपीएससी 2022 परीक्षा में ओबीसी नॉन क्रिमिलेअर, दिव्यांग श्रेणी से आईएएस बनीं। उनका प्रोबेशन जुलाई 2023 से जुलाई 2025 तक था। चयन के बाद मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में नौ महीने चार दिन रहीं। पुणे कलेक्ट्रेट में इस साल 3 जून से 21 जून तक (18 दिन) ट्रेनिंग में उन्होंने ऐसी हेकड़ी दिखाई कि यूपीएससी को संभवतः पहली बार ऐसी कार्रवाई करनी पड़ी। पूजा खेडकर की गड़बड़ियों के खुलासे में आरटीआई कार्यकर्ता विजय कुंभार के आवेदनों का बड़ा योगदान योगदान रहा।

फर्जी प्रमाणपत्र, अफसर के केबिन पर कब्जा किया पुणे में ज्वाइनिंग से पहले पूजा ने रेजिडेंट डिप्टी कलेक्टर से अलग केबिन, कार, आवास और सुरक्षा की मांग की। जबकि यह सुविधाएं ट्रेनी अफसरों को नहीं मिलती हैं।

कार पर नारंगी-नीली बत्ती और सायरन लगवाया। दूसरे अफसर के केबिन के बाहर अपनी नेम प्लेट लगवा ली।

पूजा के लिए उनके पिता और रिटायर आईएएस अफसर दिलीप खेडकर ने अफसरों को धमकाया। इस पर पुणे के कलेक्टर ने पूजा का ट्रांसफर वाशिम करवा दिया।

पूजा ने दस्तावेजों में गड़बड़ी कर 11 बार यूपीएससी परीक्षा दी। जबकि वे सिर्फ 9 बार परीक्षा दे सकती थीं।

पिता की संपत्ति 40 करोड़ रुपए से ज्यादा होने के बावजूद पूजा ने क्रीमीलेअर ओबीसी आरक्षण का फायदा उठाया। उनके दिव्यांगता प्रमाणपत्र में भी गड़बड़ी सामने आई है।

NEWS ANP के लिए नई दिल्ली से ब्यूरो रिपोर्ट