धनबाद(DHANBAD) धनबाद का न्यूनतम तापमान नौ डिग्री पहुंच गया है। शहर में मजदूरी करके अपना जीवन चला रहे छतविहीन गरीबों को इस हाड़ कंपाती ठंड में ठिठुरना पड़ रहा है। रात दस बजे के बाद पुलिस लाइन से लेकर स्टेशन तक और पॉलीटेक्निक कॉलेज से लेकर सरायढेला तक सड़क किनारे रात गुजारने वाले लोग मिल जाएंगे।
नगर निगम इन गरीबों के लिए तीन जगहों पर आश्रयगृह का निर्माण कराया है, लेकिन जानकारी के अभाव में वहां तक ये लोग नहीं पहुंच पा रहे हैं।
2017 में धनबाद नगर निगम ने 60 लाख रुपए खर्च करके स्टीलगेट में आश्रयगृह का निर्माण कराया। यहां एक साथ 50 बेड की व्यवस्था है, लेकिन यहां पिछले एक हफ्ते में मुश्किल से 10-15 लोग ही आकर रुके हैं। कई दिनों तक तो दो-तीन लोग ही यहां आकर रहते हैं। शहर से सटे ग्रामीण इलाके टुंडी, बलियापुर, निरसा के कई मजदूर तबके के लोग धनबाद आकर मजदूरी करते हैं, लेकिन आश्रयगृह की जानकारी नहीं होने के अभाव में यह मजदूर सड़कों के किनारे ठिठुरते हुए
रात गुजारने को मजबूर हैं। नगर निगम द्वारा यहां सक्षम लोगों से 25 रुपए और गरीबों को निशुल्क रहने की सुविधा दी जा रही है। इसके बावजूद आश्रयगृह में लोग नहीं पहुंच पा रहे हैं।
महिलाओं के आश्रयगृह में भी आधे बेड खाली
गोल्फ ग्राउंड में महिलाओं के लिए अलग आश्रयगृह बनाया गया है। यहां भी लगभग 48 महिलाओं के एक साथ रहने की व्यवस्था है, लेकिन हर दिन मुश्किल से 12-14 महिलाएं ही आकर यहां रहती हैं।
इनमें अधिकतर कामकाजी महिलाएं हैं, जो कहीं न कहीं काम करती हैं। इसमें जामताड़ा, गिरिडीह, बराकर, आसनसोल की महिलाएं भी रह रही हैं, लेकिन स्टेशन के बाहर रात गुजारने वाली महिलाओं को इस आश्रयगृह की जानकारी नहीं है। यहां रहने के लिए किसी तरह का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।
अलाव की भी व्यवस्था नहीं
ठंड बढ़ने के साथ ही जिला प्रशासन की ओर से सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था का निर्देश दिया गया था। शहर में एक दिन तो कुछ स्थानों पर अलाव की व्यवस्था थी लेकिन अगले दिन यह व्यवस्था ठप हो गई। शुक्रवार की रात भी सार्वजनिक स्थानों जैसे रणधीर वर्मा चौक, कंबाइंड बिल्डिंग चौक, स्टेशन रोड, हटिया मोड़, बस स्टैंड आदि में कभी भी अलाव की व्यवस्था नहीं दिखी
NEWS ANP के लिए कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट..
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