1975 के चासनाला खान हादसे के 375 शहीदों मजदूरों को नम आंखों से भावपूर्ण दिया गया श्रद्धांजलि…

धनबाद DHANBAD जिला के झरिया पाथरडीह चासनाला स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड सेल कोलियरी के डीप माइंस खान (खदान) में कोयला उत्पादन कार्य करने के दौरान खदान में पानी भर जाने से प्रथम पाली की 375 मजदूरों ने की जान चली गई थी, तब से आज तक सेल चासनाला की ओर से शाहिद मजदूरों की याद में शहीद स्मारक स्थान पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाता है, इस साल चासनाला सेल कंपनी की ओर से उस हादसे की याद में उस घटना से जुड़ी दृश्य को दर्शाने का काम किया है, वह खान दुर्घटना ने पूरा एशिया महादेश को हिला कर दिया था, उस खान दुर्घटना की कहानी इतिहास के पन्नों में काले अध्याय के रूप बेशुमार हो गया,

उसी खान दुर्घटना पर काला पत्थर फिल्म बनी, 27 दिसंबर 1975 के दोपहर 1:35 बजे चासनाला खान में जल समाधि की घटना हुई थी, आज भी उस घटना के खतरों की घंटी को बजाकर सभी लोग दो मिनट का मोन धारण दे कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित किया गया, उस घटना का जांच में सामने आया कि दुर्घटना खदान के अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा था की उस खान दुर्घटना में 375 मजदूरों की जान चली गई, खान दुर्घटना में कई मां की गोद सूनी हो गई,कई सुहागिनों की मांग का सिंदूर उजड़ा गया, कइयों के सिर से पिता का साया उठ गया, और तो और कई बहनों ने अपना भाईयो को खोया ,,आज उस काली अध्याय का 49वी बरसी है, सेल द्वारा उन शहीद मजदूरों के याद में एक शहीद स्मारक स्थल बनाया गया, जहां पर आज शहीद मजदूरों को याद करते हुए शहीद के परिजन,सेल के अधिकारी,यूनियन नेता, और विभिन्न पार्टियों के लोग नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे है,।

उस हादसे की कहानी

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड सेल कोलियरीज डिविजन की चासनाला कोलियरी के डीप माइंस खान में 27 दिसंबर वर्ष 1975 को दिल दहला देने वाली घटना घटी थी। इसे कोयलांचल के लोग कभी नहीं भूल पाएंगे। डीप माइंस खान में प्रथम पाली कार्य के दौरान 375 खनिकों ने कोयला उत्पादन करते हुए जल समाधि देकर शहादत दी थी। खान दुर्घटना के बाद कई मां की गोद सुनी हो गयीं। कई सुहागिनों की मांग का सिंदूर उजड़ गया।

कई बहनों का भाई शहीद हो गया। कइयों के सिर से पिता का साया पल भर में ही उठ गया था। चासनाला खदान हादसे में 375 खनिकों की जल समाधि हो गई थी। दुर्घटना के बाद महीनों तक खदान से पानी निकालने का कार्य हुआ। इसमें पोलैंड रूस के वैज्ञानिकों भारत सरकार ने मदद ली थी। उस हादसे की आज 49 वीं बरसी मनाई जा रही हैं, आज भी सेल चासनाला के अधिकारियों द्वारा शहीद मजदूरों की आत्मा के लिए शहीद स्मारक स्थल पर चार 4 धर्मों के गुरु से पूजा पाठ , प्रार्थना एवं श्रद्धांजलि सभा आयोजित किया जाता है,,,

मैं जला हुआ राख नहीं, अमरदीप हु, जो मिट गया वतन पर, वह मैं शहीद हूं

चासनाला की खान दुर्घटना एशिया की सबसे बड़ी खदान दुर्घटना के रूप में इतिहास के पन्नों में काला अध्याय के रूप में लिखा गया है। खान दुर्घटना के बाद काला पत्थर फिल्म भी बनी जो काफी मशहूर हुई। 27 दिसंबर 1975 के दोपहर 1:35 बजे चासनाला खान में जल समाधि की घटना हुई थी। जांच में सामने आया कि दुर्घटना खदान के अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा था। खदान में रिसनेवाले पानी को जमा करने को यहां एक बांध बनाया गया था। हिदायत भी दी गई थी की बांध की 60 मीटर की परिधि में ब्लाङ्क्षस्टग ना की जाए, परंतु अधिकारियों ने कोयला उत्पादन के चक्कर में इन निशानों को नजरअंदाज कर दिया और हैवी ब्लाङ्क्षस्टग कर दी। इस कारण 375 खनिकों की जल समाधि हो गई। दुर्घटना के बाद महीनों तक खदान से पानी निकालने का कार्य हुआ। इसमें पोलैंड, रूस के वैज्ञानिकों से भारत सरकार ने मदद ली थी।

झरिया से NEWS ANP के लिए भोला बाउरी की रिपोर्ट….