मकर संक्रांति: लंबे समय से 14 जनवरी को ही मनाई जाती रही है, लेकिन उसे 2019 से 15 जनवरी को मनाया जा रहा है. जानें क्यो आया एक दिन का अंतर?
हर साल सूर्य के राशि परिवर्तन में 20 मिनट का अंतर आ जाता है. इस प्रकार 72 सालों में 24 घंटे या एक दिन का अंतर आ जाता है. इसीलिए मकर संक्रांति मनाए जाने का दिन भी आगे बढ़ जाता है.
ग्रहों के राजा सूर्य एक निश्चित अवधि के बाद राशि परिवर्तन करते हैं, ऐसे में इस दिन को संक्रांति कहा जाता है. सूर्य ने आज यानी 15 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश किया है. सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने से इसे मकर संक्रांति कहा जाता है. हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है. इस दिन स्नान और दान से पुण्य प्राप्त होता है.
मकर संक्रांति मलमास या खरमास के अंत का प्रतीक है, जो हिंदू (पंचांग) कैलेंडर में एक अशुभ महीना है. सूर्य का मकर राशि में प्रवेश मौसम में बदलाव की शुरुआत करता है. इसे उत्तर में लोहड़ी, असम में बिहू और दक्षिण में पोंगल के रूप में मनाया जाता है.
मकर संक्रांति का विशेष महत्व उत्तर दिशा से आने वाली सूर्य की किरणों से है, जिसे देवताओं का निवास स्थान माना जाता है. इसलिए इस दिन से अच्छी शक्तियों का उदय होता है और दक्षिण दिशा में रहने वाली बुरी शक्तियों की ताकत कम हो जाती है.
2080 तक मनेगी 15 जनवरी को मकर संक्रांति:
लंबे समय से 14 जनवरी को ही मनाई जाती रही है, उसे 2019 से 15 जनवरी को मनाया जा रहा है. पिछले छह सालों में केवल वर्ष 2021 अपवाद रहा जब 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाई गई थी. लेकिन अब 2080 तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी.
NEWS ANP के लिए कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट..

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