धनबाद (DHANBAD)सौभाग्यवती महिलाएं अपने सौभाग्य को अक्षुन्य बनाये रखने तथा कन्याएं भावी जीवन के सुखी दाम्पत्य जीवन को प्राप्त करने के लिए इस ब्रत को तपस्या की तरह लगातार 24 घंटे निर्जला रहकर पूर्ण करती है ,यह व्रत कठिन व्रतों में से एक माना जाता है,ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस ब्रत को करने से सुहागिन महिलायोँ के पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य सुखी वैवाहिक जीवन और संतान की तरक्की होती है इस कठिन ब्रत का नाम हरितालिका तीज ब्रत कहा जाता है जो हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि और हस्त नक्षत्र के संयोग से होता है इसमें भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी या बल्लू से पार्थिव बना कर बिधि बिधान के साथ पूजन किया जाता है
हरितालिका तीज कब है
काशी विश्वनाथ पंचांग के अनुसार इस वर्ष भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि का शुभ प्रारंभ (5सितंबर ) गुरुवार दिन 10 बजके 6 मिनट से शुक्रवार (6सितंबर) दिन 12 बजके 9 मिनट तक रहेगा,वही हस्त नक्षत्र का संयोग गुरुवार (5 सितंबर ) प्रातः 5 बजके 33 मिनट से प्रारम्भ होकर शुक्रवार 6 सितंबर प्रातः 8 बजके 10 मिनट तक रह रहा है जिस कारण लोगो को पूजन का दिन को लेकर बहुत शंका बनी हुई है । परन्तु उदयमान सूर्य को मानते हुए 6 सितंबर दिन शुक्रवार को ही हरितालिका तीज का ब्रत मनाया जाएगा
पूजन का शुभ मुहूर्त कब है
( 1 )तृतीया तिथि और हस्त नक्षत्र का संयोग शुक्रवार प्रातः 8 बजके 10 मिनट तक रह रहा है अतः यह समय पूजन करने हेतु सर्वार्द्ध सिद्धि दायक योग है
( 2 ) तृतीया तिथि और हस्त नक्षत्र में सूर्य के उदयमान होने के कारण तथा तिथि के आधार पर पूरा दिन पूजा करना भी शुभ माना जा सकता है ।
( 3 ) शुक्रवार दिन 12 बजके 9 मिनट तक तृतीया तिथि रहने के कारण इस समय तक पूजा करने के लिए अति शुभ मुहूर्त है
( 4 ) शंकर पार्वती के पूजन करने के लिए प्रदोष काल सबसे उत्तम माना गया है इसमें पूजन करने से मनचाहा फल मिलता है अतः इस समय पर पूजन करना सबसे उत्तम होगा
चंद्र दर्शन करने से बचे
आज के दिन भगवान गजानन श्रापित रहते है इसलिए चतुर्थी के चंद्र दर्शन करने से बचे क्योकि इसके दर्शन से झूठा अपयश लगने और दुख परेशानी होने की प्रबल संभावना होती है तथा इस दोष का निवारण करवाना पड़ता है अतः आज के दिन चंद्र दर्शन करने से जरूर बचे
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूजा का बिधि बिधान
सवर्प्रथम सूर्योदय से पहले उठकर भगवान का स्मरण करें फिर दंत धावन स्नान तथा संध्या वंदन से निवृत होकर हरितालिका तीज का पूजन करने हेतु ब्राह्मण को बुलाकर शिव पार्वती की पूजन विधि विधान से करवा कर कथा श्रवण करनी चाहिए उसके बाद रात भर गीत वद्यादि के साथ जागरण करना चाहिए
जो स्त्री तृतीया तिथि का व्रत ना करके अन्न भक्षण करती है वह 7 जन्म तक बंध्या रहती है और उसको बार-बार विधवा होना पड़ता है तीज के दिन उपवास न करने से वह स्त्री घोर नरक में जाति है उस दिन अन्न खाने से सुकरी ,फल खाने से बंदरिया, पानी पीने से जोक, दूध पीने से सांपिन, मांसाहार करने से बाघिन, दही खाने से बिल्ली मिठाई खाने से चींटी, और सब खाने से मक्खी होती उस रोज सोने से अजगरी और पति को धोखा देने से मुर्गी होती है इसलिए विशेष करके स्त्रियां इस व्रत के नियम का पालन करें दूसरे दिन सोने चांदी तांबा या बाँस के पत्र में अन्न भरकर दक्षिणा सहित ब्राह्मण को दान दे उसके बाद ही पारण करें जो स्त्री इस प्रकार के नियम का पालन करती है उसे एक हज़ार अश्वमेघ यज्ञ और सैकड़ो बाजपेय यज्ञ करने का फल मिलता है और आजीवन सुखी रहती है
NEWS ANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट
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