रक्षाबंधन व सावन की अंतिम सोमवारी का शुभ संयोग एकसाथ :शिवालयों में जलाभिषेक,भाई की कलाई पर राखी बांधेंगी बहनें…

धनबाद(DHANBAD)भाई-बहनों के स्नेह व प्रेम के प्रतीक का पर्व रक्षाबंधन पर बहनें आज भाइयों की कलाई पर रक्षा का सूत्र बांध रही है। इस बार रक्षाबंधन के दिन सावन की पूर्णिमा होने के साथ सोमवारी का संयोग बन रहा है। 90 साल बाद सावन की पूर्णिमा के दिन ऐसा संयोग बन रहा है जब रक्षाबंधन के दिन कई शुभ योग रह रहे हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग,शोभन योग के साथ श्रवण नक्षत्र व घनिष्ठा नक्षत्र है। व्रत की पूर्णिमा इस पर्व की महत्ता बढ़ा रही है। सावन की पूर्णिमा पर चंद्रदेव कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। चंद्रदेव के स्वामी स्वयं भोलेनाथ हैं। इस दिन सिंह राशि में सूर्य, बुध और शुक्र की युति हो रही है। इससे शुक्रादित्य, बुधादित्य और लक्ष्मी नारायण योग, त्रिग्रही योग बन रहा है। ग्रहों और योगों के कारण कुछ राशियों पर भगवान शिव के साथ-साथ शनिदेव की भी कृपा रहेगी।

राखी बांधने का मंत्र”येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल :

पंचांग के अनुसार इस वर्ष दोपहर 2:06 बजे से रात 8:09 बजे तक रक्षाबंधन का है सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त

इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया रह रहा है। पंडित दिनेश शर्मा के अनुसार दोपहर 1:24 बजे तक भद्रा का प्रभाव रहेगा। इसके बाद दिनभर राखी बांधी जा सकेगी। रक्षाबंधन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त दोपहर 2:06 से रात 8:09 तक है। चाहें तो रक्षाबंधन महामंत्र… ‘येन बद्धो बली राजा दानवेंद्रो महाबलः। तेन त्वाम अभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥’ का जाप भी कर सकते हैं।सोमवार को देर रात 12:47 बजे तक शोभन योग रहेगा। इस योग में नए कार्यों की शुरुआत करना शुभ व फलदाई माना गया है। इस योग में भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है। इसके अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग व रवि योग भी रहेंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह योग भद्रा काल में होने से अधिक प्रभावी नहीं रहेंगे। सर्वार्थ सिद्धि सुबह 5:53 से 8:10 बजे तक रहेगा।

इधर सोमवार को सावन की अंतिम सोमवारी के साथ रक्षाबंधन का भी शुभ संयोग है. देवों के देव महादेव को समर्पित कश्रावण मास की अंतिम व पांचवीं सोमवारी को लेकर कोयलांचल के शिवालयों में विशेष तैयारी की गयी है. सोमवारी को भक्त शिवालयों में जलाभिषेक कर रहे है भूईंफोड़ मंदिर, शिव शक्ति मंदिर, शक्ति मंदिर, खड़ेश्वरी मंदिर, भूतनाथ मंदिर मटकुरिया समेत सभी मंदिरों में कहीं रूद्राभिषेक, तो कहीं बाबा भोले के विशेष श्रृंगार हो रहा है.. इस बार का श्रावण मास विशेष संयोग लेकर आया है. सोमवार से सावन की शुरूआत हुई थी और समापन भी सोमवार को हो रहा है. इसी दिन भाई बहन के स्नेह का त्योहार रक्षाबंधन भी है. श्रावण की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है.

राखी बांधने से पहले बहनों ने खरीदी राखी, बाजार में उमड़ी भीड़..

रक्षाबंधन को लेकर रविवार को बाजार में बहनों की खूब भीड़ दिखी. रंग-बिरंगी राखियों से बाजार गुलजार है. बहनों ने अपनी पंसद की राखी खरीदी और मेहंदी भी लगवायी.भाइ‌यों की लंबी आयु, स्वास्थ जीवन और उन्नति के लिए प्रार्थना करती हैं. उसके बाद भाई कीललाट पर तिलक लगाकर आरती उतारती हैं. रेशम की डोर के साथ स्नेह का राखी बांधती हैं.

NEWS ANP के लिए कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट..