पाकुड़(PAKUD) अगर आपका कोई भी सामान चोरी हो जाए तो मिलेगा भी या नहीं ये कहना मुश्किल है। लेकिन पाकुड़ में जीपीएस से लोकेशन ट्रेकिंग के जरिए एक चोरी गए टोटो को सफलतापूर्वक बरामद कर लिया गया है।दरअसल पाकुड़ शहर के मधपाड़ा से रविवार देर रात एक
टोटो चोरी हो गई।जिस टोटो को कुछ ही घंटों में बंगाल के कालियाचक से बरामद कर लिया गया है। इस खबर से तो सबसे पहले यही लगता होगा कि टोटो बरामदगी में जरूर पुलिस का हाथ होगा। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। दरअसल टोटो बरामदगी में जीपीएस ट्रैकर का ही कमाल है। इसे जागरूकता कहे या शिक्षित होने की निशानी माने, जिसके सामने टोटो चोर की सारी मेहनत पर पानी फिर गया।
दरअसल रविवार की देर रात करीब 1:30 बजे मधपाड़ा के रहने वाले एक शिक्षित और जागरूक परिवार से आने वाले जैकी सादिक की टोटो चोरी हो जाती है।अगले दिन सुबह टोटो चोरी होने की बात का पता चलता है।उन्हें जैसे ही टोटो चोरी होने का पता चलता है, पहले तो तुरंत ही सीसीटीवी कैमरे को खंगालते हैं। जिसमें रात के अंधेरे में एक अज्ञात चोर को टोटो ले जाते देखा गया है।इसके बाद जैकी सादिक को तुरंत ही उस टोटो में जीपीएस लगे होने की बात याद आती है।इतना याद आते ही लोकेशन की पड़ताल करते हैं और फिर पता चलता है कि उनकी टोटो बंगाल कालियाचक में खड़ी है।जिसे जीपीएस ट्रैकर के माध्यम से लोकेशन के जरिए से वहां तक का रास्ता तक पता चल जाता है कि टोटो किस रास्ते से गुजरते हुए
कालियाचक पहुंची और इसमें कितना समय लगा। इतना ही नहीं कितने बजे तक टोटो कालियाचक पहुंची, इसका भी पता चल जाता है। लोकेशन पता चलते ही परिवार के सदस्य और अपने साथियों को साथ लेकर सीधे कालियाचक पहुंचते हैं। जहां आसपास में ही टोटो का लोकेशन मिल रहा होता है। इसी बीच स्थानीय लोगों से पूछताछ करते हैं। तभी आसपास से चार- पांच लोग आते हैं और मदद करने की बात करते हैं। इसके बाद कुछ ही देर में एक खाली जगह पर टोटो खड़ा मिलता है। अपने साथियों से मिलकर बरामद टोटो लेकर घर पहुंचते हैं। इस घटना से इतना तो सीख लेना चाहिए कि हम किसी चीज को हजारों लाखों रुपए देकर खरीदते हैं, तो उसकी सुरक्षा के लिए थोड़ा सा और खर्च क्यों नहीं उठा सकते।
इधर टोटो मालिक जैकी सादिक ने बताया कि जीपीएस ट्रैकर बहुत ही कमाल की चीज है।आज के जमाने में हमें जागरूक रहने की आवश्यकता है। लोगों को इस बात को लेकर जागरूक होना होगा कि अगर हम लाख रुपया खर्च कर टोटो खरीद सकते हं,तो उसकी सुरक्षा के लिए सालाना ढाई-तीन हजार का खर्चा भी उठा सकते हैं। उन्होंने एक सवाल पर कहा कि पुलिस को खबर करने से मदद जरूर मिलती। लेकिन मुझे लोकेशन पता चल गया और मुझे भरोसा था कि टोटो तक पहुंच ही जाऊंगा। इसलिए पुलिस प्रशासन को परेशान करना उचित नहीं समझा। इससे यही संदेश आता है कि आधुनिक युग में इलेक्ट्रॉनिक सामान चाहे जितना हानिकारक भी है उससे कई गुना लाभदायक भी साबित हो रहा है। बस इसके प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है
NEWS ANP के लिए पाकुड़ से जयदेव की रिपोर्ट.. :
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